नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस अचानक त्यागपत्र से प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल मच गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ ही देर पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी इस्तीफा दिया था।
कविंदर गुप्ता के इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फैसले के पीछे के कारणों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उपराज्यपाल के पद छोड़ने का वास्तविक कारण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। राजनीतिक विश्लेषक इस इस्तीफे को एक महत्वपूर्ण घटना मान रहे हैं। उनका मानना है कि इसका असर लद्दाख के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ सकता है।
बता दें, कि कविंदर गुप्ता ने 18 जुलाई 2025 को लद्दाख के तीसरे लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में शपथ ली थी। पद संभालते समय उन्होंने कहा था कि वे केंद्र शासित प्रदेश के विकास और तरक्की के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करेंगे।
उनका कार्यकाल ऐसे समय में रहा जब लद्दाख में कई सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे संगठनों ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर लगातार आंदोलन किया था।
फिलहाल, कविंदर गुप्ता के इस्तीफे के बाद अब यह देखना अहम होगा कि लद्दाख का अगला लेफ्टिनेंट गवर्नर किसे बनाया जाता है।

