मंदसौर। जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, मंदसौर विश्वविद्यालय द्वारा ‘21वीं सदी में मीडिया शिक्षा की जरूरत’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के. जी. सुरेश तथा राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के पूर्व विभाग प्रमुख प्रोफेसर संजीव भानावत बतौर अतिथि वक्ता उपस्थित रहे। वेबिनार के आरंभ में मंदसौर विश्वविद्यालय के कुलपति ब्रिगेडियर डॉ. भरत सिंह रावत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय प्रवर्तन किया। अपने सम्बोधन में डॉ. रावत ने कहा कि मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के अलावा देश भर उन युवाओं के लिए यह वेबिनार एक कैरियर काउंसिलिंग की तरह है जिससे बाद उन्हें मीडिया के क्षेत्र में किसी भी अन्य सलाहकार के पास जाने की जरूरत नहीं । मीडिया शिक्षा की जरूरत विषय पर बोलते हुए प्रोफेसर संजीव भानावत ने कहा कि देश में लगातार मीडिया के प्रति एक नकारात्मक माहौल दिखाई सुनाई भले ही देता हो लेकिन जिस ज़िम्मेदारी और लगन से देश के युवा मीडिया के प्रति समर्पित होकर काम कर रहे हैं उससे जरूर भविष्य बदलेगा। अपनी खुद की अकादमिक यात्रा का जिक्र करते हुए प्रोफेसर भानावत कहते हैं कि भारत में 100 वर्षों से अधिक मीडिया शिक्षा को हो चुके हैं ऐसे में अब इस विषय पर सभी का ध्यान जाना आरंभ हुआ है। अब समय मीडिया शिक्षा का है और युवाओ के आने से एक नई दिशा भी मिलेगी। वेबिनार में विशिष्ट अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित माखनलाल राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के जी सुरेश ने कहा कि समय के साथ साथ चलना मानवीय प्रवृत्ति है। ऐसे में मीडिया शिक्षा को बढ़ावा और उसकी तकनीकी पक्षों पर बात करने कि अब ज्यादा जरूरत है । कई आंकड़े कहते हैं कि मीडिया जगत में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। संचार के माध्यम जरूर बदल रहे हैं लेकिन उतनी ही बड़ी क्षमता के साथ युवाओ ने इन माध्यमों में अपने आपको प्रशिक्षित भी कर लिया है। देश के युवा अब यूट्यूब ब्लॉगिंग, डिजिटल मार्केटिंग के साथ साथ सोशल मीडिया के अन्य आयामों के साथ धमाल मचा रहे हैं। जहां नाम के साथ पैसा भी खूब है। वेबिनार के अंत में जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष और मंदसौर विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. मनीष जैसल ने कहा कि मीडिया की नकारात्मकता को नज़रअंदाज़ करते हुए आज के समय में जनसंचार के विभिन्न माध्यमों पर अगर युवा अच्छी पकड़ रखे तो रोजगार के संकट से उन्हें एक हद तक मुक्ति मिल सकती है। क्योकि नए रोजगार का सृजन अब नए संचार माध्यमों में ज्यादा दिखता है। मालवा के क्षेत्र में यह इकलौता ऐसा विभाग हैं जहां आपको मीडिया की तकनीकी शिक्षा के साथ साथ देश के उन मीडिया शिक्षकों से रूबरू कराया जाता है जिनहोने मीडिया शिक्षा में अपना मुकाम हासिल किया है। इस वेबिनार में देश भर के 700 से अधिक प्रतिभागियों ने नामांकन कराया था। जिनमें यूपी, एम पी, राजस्थान, हरयाणा, तेलंगाना, तमिलनाडू, कर्नाटक, असम, कोलकाता आदि राज्यों से प्रतिभागी रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक डॉ. शैलेंद्र शर्मा, डीन एडमिन, कर्नल आनंद कुमार, कुलसचिव आशीष पारिक तथा अन्य पदाधिकारियों ने शुभकामनायें प्रेषित की।
