नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह का पता नहीं चल पाया है। इस्तीफा देने के बाद वे दिल्ली रवाना हो गए हैं। सीवी आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था।
इस इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बता दें, कि पश्चिम बंगाल में इसी वर्ष अप्रैल-मई में चुनाव होने को हैं। इस बीच ये घटनाक्रम सामने आया है। हालांकि अब तक न तो राजभवन की ओर से और न ही केंद्र सरकार की ओर से इस फैसले को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
सीवी आनंद बोस केरल के कोट्टायम के रहने वाले है। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी पी.के. वासुदेवन नायर थे। वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी थे। इसलिए उनके नाम में ‘बोस’ जोड़ा गया। वह 1977-बैच के रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। उन्हें 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया। वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। आनंद बोस ने सरकार के सचिव के पद पर कार्य किया है. भारत के मुख्य सचिव और विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे हैं। वह संयुक्त राष्ट्र के साथ परामर्शदात्री स्थिति में पर्यावास गठबंधन के अध्यक्ष हैं और संयुक्त राष्ट्र पर्यावास शासी परिषद के सदस्य थे। राज्यपाल बोस ने शिक्षा, वन और पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे कई मंत्रालयों में जिला कलेक्टर और प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में काम किया है।
सीवी आनंद बोस को उनके काम के लिए कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले हैं। भारत सरकार ने उन्हें नेशनल हाउसिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उनके कई विकास संबंधी प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र ने चार बार ‘ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में चुना था। इसके अलावा उन्होंने सबरीमाला मंदिर से जुड़े पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति का भी नेतृत्व किया था।
सीवी आनंद बोस प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ एक लेखक भी हैं। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम भाषाओं में करीब 32 किताबें लिखी हैं। इन किताबों में प्रशासन, समाज और विकास से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने सस्ती आवास योजना, सुशासन, विज्ञान और तकनीक, कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों की स्थापना में भी भूमिका निभाई है।

