लखनऊ। आल इंडिया मुस्लिम मजलिस संगठन ने अपने बयान में बुधवार को कहा, कि भारत एक बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश है, जहां सभी धर्मों और समुदायों की आस्थाओं का सम्मान करना हमारी साझा विरासत और संवैधानिक मूल्यों का हिस्सा है।
मजलिस ने कहा कि सनातन धर्म में गाय को माता के समान पूजनीय माना जाता है और करोड़ों लोगों की उससे गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। संगठन का मानना है कि किसी भी समाज की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का कितना सम्मान करता है।
इसी भावना के तहत आल इंडिया मुस्लिम मजलिस ने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने और गोवंश के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को न्यायोचित बताते हुए उसका समर्थन व्यक्त किया है।
मजलिस के अनुसार, यदि देश के विभिन्न समुदाय एक-दूसरे की आस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव प्रकट करें, तो इससे समाज में फैल रही नफरत, अविश्वास और वैमनस्य की राजनीति पर स्वाभाविक रूप से अंकुश लगाया जा सकता है। संगठन का कहना है कि ऐसी पहल भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मजलिस ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में देश को टकराव नहीं बल्कि संवाद, सम्मान और सह-अस्तित्व की आवश्यकता है। यदि सभी समुदाय सकारात्मक सोच के साथ आगे आएं, तो देश में शांति, सौहार्द और सामाजिक समरसता का वातावरण और मजबूत होगा।
आल इंडिया मुस्लिम मजलिस ने आशा जताई है कि यह पहल देश में आपसी विश्वास, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।

