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मन्दसौर विश्वविद्यालय में छः दिवसीय रेडियो कार्यक्रम निर्माण पर कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ

प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर के भिन्न संस्थानों के करीब 700 प्रतिभागियों ने कराया नामांकन 

मन्दसौर। रेडियो आपकी कल्पना को बाधित नहीं करता। रेडियो एक जगह पर हमें बांधकर नहीं रखता। किसी भी शब्द को कहने का लहज़ा, उस शब्द की गरिमा को बनाए रखता है। उक्त कथन प्रसिद्ध रेडियो एनाउंसर कमल शर्मा ने कहे। वे मन्दसौर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित छः दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले दिन छात्रों को  प्रशिक्षण देते हुए बोल रहे थे। कमल शर्मा ने कहा कि रेडियो संचार का सस्ता व बहुपयोगी माध्यम है। समय व परिस्थितियों से  रेडियो में नवाचार आया लेकिन उसकी संस्कृति नहीं बदली और श्रोताओं का विश्वास भी नहीं बदला।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ततपश्चात पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार जैसल ने स्वागत भाषण में कहा कि कोरोना काल के बाद देश में रेडियो पर पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है जो कि छात्रों के लिए बहुपयोगी होगा। कार्यक्रम में मन्दसौर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. शैलेन्द्र शर्मा ने प्रशिक्षण शाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि सीखने की कोई तय सीमा नहीं होती। किसी भी कला को कौशल विकास से ही निखारा जा सकता हैं। डॉ. शर्मा ने कमल शर्मा का स्वागत करते हुए कहा कि जिस आवाज की खूबसूरती को महसूस किया था आज उसको देखने का अवसर मिला है। छात्रों के लिए सुअवसर है कि रेडियो क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्तित्व से वह रेडियो की बारीकियां सीखेंगे। 

अंत में आभार कला संकाय के डीन डॉ. लोकेश्वर सिंह जोधाना ने माना। संचालन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहा. प्रो. अरुण कुमार जायसवाल ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मन्दसौर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सोनाली सिंह, डॉ. अनुराधा सेठी, डॉ. प्रतीक गुप्ता, सहायक प्रो. श्रद्धा झलोया, सहायक प्रो. शालिनी पांडे सहित अन्य विभागों के फैकल्टी सदस्य  उपस्थित थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम द्वारा देशभर के मीडिया संस्थानों से सैकड़ो छात्र एवं शोधार्थी एवं प्रत्यक्ष रूप से सौ से अधिक छात्र- छात्राओं ने भाग लिया। उक्त जानकारी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा दी गई।

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