नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में विश्व नदी दिवस पर चर्चा की। उन्होंने कहा हमारे देश में कहा जाता है कि “पिबन्ति नद्यः, स्वय-मेव नाम्भः”, अर्थात नदियाँ अपना जल खुद नहीं पीती, बल्कि परोपकार के लिये देती हैं। हमारे लिये नदियाँ एक भौतिक वस्तु नहीं है, हमारे लिए नदी एक जीवंत इकाई है, और तभी तो, तभी तो हम, नदियों को माँ कहते हैं। हमारे कितने ही पर्व हो, त्यौहार हो, उत्सव हो, उमंग हो, ये सभी हमारी इन माताओं की गोद में ही तो होते हैं। गुजरात में बारिश की शुरुआत होती है तो गुजरात में जल-जीलनी एकादशी मनाते हैं। मतलब की आज के युग में हम जिसको कहते है ‘Catch the Rain’ वो वही बात है कि जल के एक-एक बिंदु को अपने में समेटना, जल-जीलनी।
उसी प्रकार से बारिश के बाद बिहार और पूरब के हिस्सों में छठ का महापर्व मनाया जाता है। मुझे उम्मीद है कि छठ पूजा को देखते हुए नदियों के किनारे, घाटों की सफाई और मरम्मत की तैयारी शुरू कर दी गई होगी। हम नदियों की सफाई और उन्हें प्रदूषण से मुक्त करने का काम सबके प्रयास और सबके सहयोग से कर ही सकते हैं। ‘नमामि गंगे मिशन’ भी आज आगे बढ़ रहा है तो इसमें सभी लोगों के प्रयास, एक प्रकार से जन-जागृति, जन-आंदोलन, उसकी बहुत बड़ी भूमिका है। देश भर में नदियों को पुनर्जीवित करने के लिये, पानी की स्वच्छता के लिये सरकार और समाजसेवी संगठन निरंतर कुछ-न-कुछ करते रहते हैं। उन्होंने तमिलनाडु के वेल्लोर और तिरुवन्नामलाई जिले में बहने वाली नदी नागानधी और गुजरात में बहने वाली साबरमती नदी के पुनर्जीवन की चर्चा की।
पीएम मोदी ने कहा कि आज आजादी के 75वें साल में हम जब आजादी के अमृत महोत्सव को मना रहे हैं, आज हम संतोष से कह सकते हैं कि आजादी के आंदोलन में जो गौरव ‘खादी’ को था आज हमारी युवा पीढ़ी ‘खादी’ को वो गौरव दे रही है। आज खादी और हैंडलूम का उत्पादन कई गुना बढ़ा है और उसकी मांग भी बढ़ी है। आप भी जानते हैं कि ऐसे कई अवसर आए हैं जब दिल्ली के खादी शोरूम में एक दिन में एक करोड़ रूपए से ज्यादा का कारोबार हुआ है।
पीएम मोदी ने कहा कि सियाचिन ग्लेशियर के बारे में हम सभी जानते हैं। वहां की ठंड ऐसी भयानक है, जिसमें रहना आम इंसान के बस की बात ही नहीं है। कुछ ही दिन पहले सियाचिन के इस दुर्गम इलाके में आठ दिव्यांग जनों की टीम ने जो कमाल कर दिखाया है वो हर देशवासी के लिए गर्व की बात है। शरीर की चुनौतियों के बावजूद भी हमारे इन दिव्यांगों ने जो कारनामा कर दिखाया है वो पूरे देश के लिए प्रेरणा है और जब इस टीम के सदस्यों के बारे में जानेंगे तो आप भी मेरी तरह हिम्मत और हौसले से भर जाएंगे। इन जांबाज दिव्यांगों के नाम हैं – महेश नेहरा, उत्तराखंड के अक्षत रावत, महाराष्ट्र के पुष्पक गवांडे, हरियाणा के अजय कुमार, लद्दाख के लोब्सांग चोस्पेल, तमिलनाडु के मेजर द्वारकेश, जम्मू-कश्मीर के इरफ़ान अहमद मीर और हिमाचल प्रदेश की चोन्जिन एन्गमो। सियाचिन ग्लेशियर को फतह करने का ये ऑपरेशन भारतीय सेना के विशेष बलों के veterans की वजह से सफल हुआ है। यह हमारे देशवासियों के ‘Can Do Culture’ ‘Can Do Determination’ ‘Can Do Attitude’ के साथ हर चुनौती से निपटने की भावना को भी प्रकट करता है
पीएम मोदी ने कहा कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर, खेती में हो रहे नए प्रयोग, नए विकल्प, लगातार, स्वरोजगार के नए साधन बना रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बिलाल अहमद शेख और मुनीर अहमद शेख ने जिस प्रकार अपने लिए नए रास्ते तलाशे, वो New India की एक मिसाल है। अपनी उच्च शिक्षा से जुड़े अनुभवों का इस्तेमाल आज वो कृषि में खुद का Start-up बनाकर कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि कभी भी छोटी बात को और छोटी चीज को छोटी मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर महात्मा गांधी जी के जीवन की तरफ हम देखेंगे तो हम हर पल महसूस करेंगे कि छोटी-छोटी बातों की उनके जीवन में कितनी बड़ी अहमियत थी और छोटी-छोटी बातों को ले करके बड़े बड़े संकल्पों को कैसे उन्होंने साकार किया था। हमारे आज के नौजवान को ये जरूर जानना चाहिए कि साफ-सफाई के अभियान ने कैसे आजादी के आंदोलन को एक निरंतर ऊर्जा दी थी। ये महात्मा गांधी ही तो थे, जिन्होंने स्वच्छता को जन-आन्दोलन बनाने का काम किया था।
आज हम लोगों की जिंदगी का हाल ये है कि एक दिन में सैकड़ों बार कोरोना शब्द हमारे कान पर गूंजता है, 100 साल में आई सबसे बड़ी वैश्विक महामारी कोविड-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है। हेल्थकेयर और वेलनेस को लेकर आज जिज्ञासा और जागरूकता बढ़ी है। पीएम मोदी ने कहा पंडित दीनदयाल ने सीख दी कि हमारे पास जो कुछ भी है, वो देश की वजह से ही तो है इसलिए देश के प्रति अपना ऋण कैसे चुकाएंगे, इस बारे में सोचना चाहिए। ये आज के युवाओं के लिए बहुत बड़ा सन्देश है।