लखनऊ। सुबह स्कूल की घंटी बजने से पहले ही प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों की रसोई में चूल्हा जल जाता है। बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की इस जिम्मेदारी को निभाने वाली रसोइयों के लिए रविवार का दिन सिर्फ सम्मान का नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की नई शुरुआत का भी गवाह बना। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय स्टेट बैंक के बीच रसोइया सामाजिक सुरक्षा को लेकर समझौता हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुए इस एमओयू के तहत पीएम पोषण योजना से जुड़े रसोइयों और उनके परिवारों को दुर्घटना की स्थिति में दो लाख रुपये की सहायता का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया जाएगा। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा और एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक दीपेश राज ने समझौते का आदान-प्रदान किया।
सिर्फ खाना बनाने वाली नहीं, बच्चों के पोषण की जिम्मेदार कड़ी
सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला भोजन अक्सर सिर्फ एक थाली के रूप में देखा जाता है, लेकिन उसके पीछे रसोइयों की रोजमर्रा की मेहनत छिपी रहती है। भोजन तैयार करने से लेकर रसोई की व्यवस्था संभालने तक उनकी भूमिका पीएम पोषण योजना के संचालन में अहम है।
इसी भूमिका को केंद्र में रखते हुए सरकार ने इस बार रसोइयों के लिए सम्मान के साथ स्वास्थ्य और दुर्घटना सुरक्षा को भी जोड़ा है। प्रदेश में पीएम पोषण योजना से जुड़े करीब 3.53 लाख रसोइयों को इन सुविधाओं का लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है।
दुर्घटना की स्थिति में परिवार को मिलेगा सहारा
रसोइया सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत एसबीआई के साथ हुआ समझौता इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्घटना की स्थिति में दो लाख रुपये की सहायता का प्रावधान ऐसे परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बन सकता है, जिनकी आय सीमित होने के कारण अचानक आने वाला संकट बड़ा बोझ बन जाता है।
सरकार और बैंक के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य रसोइयों को बैंकिंग व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के दायरे से जोड़ना भी है।
₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा
कार्यक्रम में रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी दिए गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रसोइयों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक वर्ष में पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का प्रावधान किया गया है। यह सुविधा सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी।
यानी सरकार की नई पहल में सुरक्षा का दायरा केवल कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के स्वास्थ्य को भी इसमें शामिल किया गया है।
मानदेय में भी बढ़ोतरी, कपड़ों की राशि हुई दोगुनी
रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा के साथ आर्थिक राहत का भी ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री ने मानदेय को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की। इसके अलावा परिधान के लिए मिलने वाली राशि को भी बढ़ाया गया है। अब इसके लिए 500 रुपये के बजाय 1,000 रुपये दिए जाने की जानकारी दी गई है।
इन फैसलों से सरकार ने रसोइयों की जरूरतों को केवल सम्मान समारोह तक सीमित रखने के बजाय उनके नियमित आर्थिक हितों से जोड़ने का प्रयास किया है।
मंच पर 11 रसोइयों का सम्मान
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 11 रसोइयों को मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिला। उन्हें कैशलेस चिकित्सा कार्ड, बढ़े हुए मानदेय का चेक और परिधान किट प्रदान की गई।
सम्मान पाने वालों में सीतापुर की किरन देवी, लखनऊ की आशा तिवारी, गोरखपुर की सुनीता और रेखा देवी, अलीगढ़ की सुदेश देवी और पिंकी देवी, वाराणसी की सरिता दीक्षित, हरदोई की गीता देवी, लखीमपुर खीरी की सीमा सिंह, उन्नाव की खिलाना और रायबरेली की रेखा शामिल रहीं।
लखनऊ से जिलों तक पहुंचा सम्मान का संदेश
राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के साथ प्रदेश के अलग-अलग जिलों और तहसील स्तर पर भी रसोइयों के सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे राज्य स्तरीय आयोजन को स्थानीय स्तर से जोड़ने की कोशिश की गई।
कार्यक्रम में पीएम पोषण योजना की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसका उद्देश्य योजना और उसमें योगदान देने वाले रसोइयों की भूमिका को सामने लाना रहा।
एक थाली के पीछे मेहनत करने वालों को मिला सुरक्षा कवच
रसोइया अक्सर स्कूल की व्यवस्था का वह हिस्सा होती हैं, जिनकी मौजूदगी बच्चों की थाली में दिखाई देती है, लेकिन जिनकी मेहनत पर बहुत कम चर्चा होती है। रविवार के कार्यक्रम ने इसी अनदेखी मेहनत को सार्वजनिक सम्मान के साथ जोड़ दिया।
सरकार की ओर से घोषित मानदेय वृद्धि, स्वास्थ्य सुविधा, परिधान राशि और दुर्घटना सहायता को एक साथ देखें तो यह पहल रसोइयों के लिए आय, इलाज और आकस्मिक संकट—तीनों स्तरों पर सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश के रूप में सामने आती है।
अब स्कूल की रसोई में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली इन रसोइयों के लिए सरकार का संदेश सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं है—बल्कि यह भी है कि उनके पीछे खड़े परिवार को मुश्किल वक्त में अकेला न छोड़ने की व्यवस्था बनाई जाए।

