ज्योति सिंह अर्धांगनी बन तुम्हारी, मैं संगिनी हो गई साथ होकर मैं तुम्हारे, सम्मिलित तुझमे हो गई। बना सागर तुझे, मैं खुद नदिया बन गई छोड़ पर्वत जंगल, तुझसे आकर मिल गई भुला अपने गुण-अवगुण, तुम जैसी मैं हो गई साथ होकर मैं तुम्हारे, सम्मिलित तुझमे हो गई। लुटा प्रेम …
Read More »बन भौरा मैं यूँ ही, खुशियां लुटाता रहूँ।
के0 एम0 भाई बावरा मन कहता है,बन भौरा मैं यूँ ही, खुशियां लुटाता रहूँ।न कोई हिसाब हो न हो कोई व्यापार, ज़िन्दगी के सफर में… यूँ ही सपने सजाता रहूँ,बन भौरा मैं यूँ ही, खुशियां लुटाता रहूँ।न पथ की चिंता हो, न हो पथिक का इंतज़ार इंसानियत की राह पे…… …
Read More »हम फिर आवाज़ उठायेंगे..!
के.एम. भाई तुम तोड़ोतुम बांटोतुम रोकोहम जोड़ेंगेहम फिर खड़े होंगेहम फिर चलेंगेनारे भी लगेंगेझंडे भी लहराहेंगेअपने अधिकारों के लिएहम फिर आवाज़ उठायेंगे..एक एक करकेहम फिर साथ आएँगेचक्का भी जाम करेंगेधरना भी करेंगे हम अपनी आवाज़फिर बुलंद करेंगे..नारे भी लगेंगेझंडे भी लहराहेंगेअपने अधिकारों के लिएहम फिर आवाज़ उठायेंगे..हम फिर आवाज़ उठायेंगे..
Read More »हटिया खुली बजाजा बंद, गुरू झाड़े रहो कलट्टरगंज….. एक चिकाही
अजय पत्रकार की कलम से….. शीर्षक पढकर चौंकिए मत…सत्य है! हटिया खुली बजाजा बन्द, झाड़े रहो कलेक्टरगंज ये कहावत कानपुर के साथ जुड़ी है और लगभग पूरे देश में कानपुर से परिचित लोगों के मुंह से सुनने को मिलेगी।अटल जी भी पूरी मस्ती से कानपुर आने पर जरूर कहते थे। …
Read More »
