लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जनपद बरेली की ग्राम पंचायत भरतौल ने सतत विकास, संसाधन सृजन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ऐसा स्वच्छता मॉडल स्थापित किया है, जिसने पूरे प्रदेश में एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है। भरतौल पंचायत ने न केवल अपने गांव को स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी बनाया, बल्कि आय के स्थानीय स्रोत विकसित कर स्वयं को आत्मनिर्भर पंचायत के रूप में स्थापित किया है।
गांव में कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक रूप देने हेतु वर्मी कम्पोस्ट केंद्र और रेसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से जैविक अपशिष्ट से खाद बनाकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक पंचायत को वर्मी कम्पोस्ट बिक्री से ₹55,000 तथा डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण से ₹65,000 की आय प्राप्त हुई है। साथ ही OSR खाते में कुल ₹3,25,000 संचित हैं। इस राशि का उपयोग भविष्य की आय बढ़ाने वाले विकास कार्यों में किया जा रहा है। आय सृजन के इसी उद्देश्य के तहत ग्राम पंचायत गेस्ट हाउस का निर्माण कर रही है, जिससे बाहरी आगंतुकों के लिए आवास सुविधा और ग्रामीणों के लिए नए रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे। यह ग्राम पंचायत कार्बन न्यूट्रल पुरस्कार के लिए भी पात्र हो गई है जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में इसकी उत्कृष्ट उपलब्धि को दर्शाता है।
भरतौल की उपलब्धियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि यदि पंचायतें सही दृष्टि, पारदर्शिता और सामुदायिक सहभागिता के साथ संसाधन प्रबंधन करें, तो वे विकास का मजबूत मॉडल बन सकती हैं। भरतौल अब प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में उभर रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उदाहरण पेश कर रहा है।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों का उद्देश्य गांवों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। भरतौल जैसे मॉडल ग्राम हमारे प्रयासों की सफलता और जनता के सहयोग का बेहतरीन प्रमाण हैं। ऐसे श्रेष्ठ कार्यों को पूरे प्रदेश में बढ़ावा दिया जाएगा।
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि भरतौल ने यह सिद्ध किया है कि नवाचार और जनभागीदारी से पंचायतें आत्मनिर्भर बन सकती हैं। OSR मॉडल पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

