कोलकाता। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पश्चिम बंगाल दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। गोसाईंपुर में अंतर्राष्ट्रीय संथाली काउंसिल के 9वें सम्मेलन में शामिल होने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में शिकायती लहजे में कहा, ‘मुझे नहीं पता, ममता मुझसे क्यों नाराज़ हैं।’
राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़ने, स्वागत में मुख्यमंत्री या मंत्रियों की अनुपस्थिति और सभा स्थल बदलने जैसी व्यवस्थाओं पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य और राज्यपाल को उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सम्मेलन में आदिवासी और संथाली समाज के मुद्दों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कटाक्ष किया कि सभा में जितने लोग मौजूद हैं, उससे अधिक लोग आ सकते थे, लेकिन शायद कुछ लोग नहीं चाहते थे कि आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में पहुंचे। उनका इशारा सीधे राज्य सरकार की ओर था।
विधाननगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ‘ममता मेरी बहन जैसी हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। बंगाल से मुझे प्यार है। लेकिन शायद ममता नाराज़ हैं, इसलिए स्वागत करने नहीं आयीं।’
इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जानकारों का कहना है कि शायद पहली बार किसी राष्ट्रपति ने किसी राज्य सरकार के खिलाफ इतना आक्रामक रुख अपनाया है। भाजपा ने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है। वहीं, स्थानीय नेताओं ने आयोजन में समन्वय की कमी और आदिवासी समाज की उपेक्षा पर भी सवाल उठाए।

