लखनऊ। हज़ारों ग्रामीण परिवारों के लिए निराशा को उम्मीद में बदलते हुए, पंचायत राज विभाग के अंतर्गत बनाए गए पंचायत कल्याण कोष ने पिछले तीन वर्षों में मृत पंचायत प्रतिनिधियों के 3,866 परिवारों को ₹136 करोड़ की सहायता राशि वितरित की है। यह जानकारी बुधवार को प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दी।
उन्होंने बताया कि 2021 के पंचायत चुनावों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में तीन-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था में लगभग आठ लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। इनमें से अधिकांश बिना वेतन या बिना भत्ते के काम करते हैं, जिससे मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार आर्थिक रूप से असुरक्षित हो जाते हैं। इस योजना की शुरुआत 15 सितंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य उन पंचायत प्रतिनिधियों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, जो निर्वाह भत्ते या वेतन के बिना अपने ग्राम, क्षेत्र या जिला पंचायतों में सेवा करते हैं और दुर्भाग्यवश असामयिक मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। इस योजना से प्रभावित कई परिवारों ने इसे ‘जीवन बदलने वाली राहत’ बताया है।
मंत्री ने बताया कि खीरी जिले की ग्राम सभा सदस्य रेखा देवी की मृत्यु के बाद उनके परिवार को ₹2 लाख की सहायता मिली, जिससे उनकी बेटी पूजा की शादी संपन्न हो सकी। उन्नाव जिले के मियागंज ब्लॉक के क्षेत्र पंचायत सदस्य उदन सिंह के पुत्र को ₹3 लाख की आर्थिक सहायता राशि मिली।
पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में ₹136.22 करोड़ की सहायता राशि 3,866 लाभार्थी परिवारों को वितरित की गई है। इस योजना ने हजारों परिवारों को कठिन समय में संबल प्रदान किया है।
प्रदान की जाने वाली सहायता राशि :
ग्राम प्रधान / क्षेत्र पंचायत प्रमुख / जिला पंचायत अध्यक्ष ₹10 लाख, जिला पंचायत सदस्य रू ₹5 लाख, क्षेत्र पंचायत सदस्य रू ₹3 लाख, ग्राम पंचायत सदस्य रू ₹2 लाख
पिछले तीन वर्षों में वितरित धनराशि :
665 ग्राम प्रधानों के परिजनों को ₹66.50 करोड़
2 क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के परिजनों को ₹20 लाख
15 जिला पंचायत सदस्यों के परिजनों को ₹75 लाख
509 क्षेत्र पंचायत सदस्यों के परिजनों को ₹15.27 करोड़
2,675 ग्राम पंचायत सदस्यों के परिजनों को ₹53.50 करोड़
उपनिदेशक पंचायती राज योगेन्द्र कटियार ने बताया कि सहायता हेतु आवेदन राज्य की पंचायत राज वित्त पोर्टल prdfinance.up.gov.in पर ऑनलाइन जमा किए जाते हैं। दस्तावेज़ सत्यापन के उपरांत स्वीकृत राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। उन्होंने कहा इस योजना का मानवीय और सामाजिक प्रभाव अत्यंत गहरा है। कई परिवार इस सहायता से शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि, छोटे व्यवसाय और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

