अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से जुड़े कथित गबन प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने करीब 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है और शनिवार देर रात अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गई। हालांकि जांच टीम के करीब 20 सहयोगी सदस्य अभी भी राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद हैं और जांच से संबंधित सूचनाएं एकत्र कर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से एक बार फिर पूछताछ की। बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक चली इस पूछताछ की वीडियोग्राफी भी कराई गई। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। दानपात्र प्रकरण में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर कुछ सेवादारों की सेवाएं भी समाप्त की जा सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच में मंदिर के चढ़ावे की राशि में गबन के सबूत मिलने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि गणना कर्मियों, बैंक कर्मियों और टिन्नू यादव की भूमिका सामने आई है, जिनके खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज की जा सकती है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। जांच टीम को इनके खिलाफ कई गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य मिलने की बात कही जा रही है।
जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आने का दावा किया गया है, जिनके चलते मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में आए हैं। सूत्रों का कहना है कि अयोध्या से लौटने के बाद एसआईटी सोमवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप सकती है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इस मामले की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था और टीम 15 जून को अयोध्या पहुंची थी। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस तथा विशेष सचिव वित्त नील रतन सहित टीम के अधिकारियों ने छह दिनों तक ट्रस्ट पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों और पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार जांच में चढ़ावे की राशि में चोरी की पुष्टि होने का दावा किया गया है तथा कुछ संदिग्धों ने पूछताछ में इसे स्वीकार भी किया है।

