लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जल्द ही भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक जीवन दर्शन का एक नया केंद्र बनने जा रही है। योगी सरकार ने प्रदेश में एक ऐसे आधुनिक संग्रहालय के निर्माण को मंजूरी दी है, जहां जन्म से लेकर मृत्यु तक भारतीय जीवन के हर संस्कार और परंपरा को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत रूप में देखा और महसूस किया जा सकेगा।
सरकार ने उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्रहालय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के लिए 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये जारी करने की अनुमति भी प्रदान की गई है।
यह संग्रहालय पारंपरिक म्यूजियम की अवधारणा से कहीं आगे होगा। यहां आने वाले लोग सिर्फ प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कृति को अनुभव कर सकेंगे। 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राम, पैनोरमिक वीडियो वॉल और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानों, संस्कारों और भारतीय जीवन मूल्यों को सजीव बनाया जाएगा।
परियोजना में प्रवेश प्लाजा, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, ओपन थिएटर, आवासीय ब्लॉक, तालाब, स्मारिका केंद्र और सौर ऊर्जा आधारित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का वास्तुशिल्प भारतीय परंपरा और आधुनिक डिजाइन का अनूठा संगम होगा।
संग्रहालय की थीम भारतीय जीवन के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—पर आधारित होगी। पहली गैलरी में वैदिक परंपराओं, पंचमहाभूतों और भारतीय रीति-रिवाजों की जड़ों को प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं दूसरी और तीसरी गैलरी में जन्म, शिक्षा, विवाह, गृहस्थ जीवन और दैनिक पूजा-पद्धतियों से जुड़े संस्कारों को रोचक और अनुभवात्मक रूप में दिखाया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य इस परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और लोक ज्ञान को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाना है। यह केंद्र भविष्य में संस्कृति, पर्यटन और आध्यात्मिक अध्ययन का एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।

