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हादसे में जवान की मौत के बाद शव पहुंचा पैतृक गांव, विधायक ने दी श्रद्धांजलि

कौशांबी। जिले के उदिहिन बुजुर्ग निवासी जवान अजीत शुक्ला की राजस्थान में मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि फौजी अजीत शुक्ला राजस्थान के श्रीगंगानगर में ट्रेनिंग करके लौट रहे थे तभी जवानों की जिप्सी पलट गई। इसके बाद उसमें आग लग गई। हादसे में तीन जवानों की मौत हो गई है। मृतकों में कौशाम्बी जिले का फौजी बेटा अजीत भी शामिल था। हादसे में जवान की मौत के बाद शव उसके पैतृक गांव उदिहिन बुजुर्ग पहुंचा। तिरंगे में लिपटा शव को देखते ही परिजनों में हाहाकार मच गया। पिता, पत्नी व बच्चों के आंसू नहीं थम रहे है। जवान के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे भाजपा विधायक ने श्रद्धांजलि अर्पित किया। जिसके बाद शव का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 
पइंसा थाना क्षेत्र के अजीत शुक्ला (40) पुत्र राधाकृष्ण शुक्ल सेना में वर्ष 2003 में भर्ती हुआ था। वर्ष 2009 में अजीत की शादी प्राची शुक्ला के साथ हुई थी। अजीत के दो बच्चे हैं, 12 वर्ष का आदी और पांच साल की रिद्धि। भरा-पूरा परिवार था। अजीत पंजाब के भंटिठा में तैनात था। जेसीओ के पद पर अजीत का प्रमोशन होना था। इसके लिए अजीत शुक्ला राजस्थान के श्री गंगा नगर में युद्धाभ्यास के लिए गए थे। बुधवार को जवान युद्धाभ्यास से वह लौट रहे थे। इसी दौरान वापस लौटते समय जवानों से भरी जिप्सी पलट गई। जिप्सी के पलटने के बाद आग लग गई। हादसे में तीन जवानों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसमें अजीत शुक्ला भी शामिल थे। वही तीन जवान गंभीर रूप से घायल हैं। बुधवार को ही जवान की मौत के 1 दिन बाद शुक्रवार को जवान का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव उदिहिन बुजुर्ग पहुंचा। जहां जवान के पार्थिव शरीर को देखकर वहां मौजूद हर एक लोगों की आंखें नम हो गई। वही भाजपा से सिराथू विधायक शीतला प्रसाद पटेल मृतक फौजी के गाँव उदिहिन बुजुर्ग पहुँचे। वहां उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मृतक फौजी के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दिया। जिसके बाद मृतक फौजी का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। लोगों की आंखें उस समय सबसे ज्यादा नम हो गई जब उन्होंने एक पिता को अपने बेटे की चिता को मुखाग्नि देते हुए देखा। 
शहीद फौजी अजीत शुक्ला को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे सिराथू विधायक शीतला प्रसाद पटेल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि फौजी के शहीद होने पर भारत सरकार के अलावा जो भी मदद होगी उसके अलावा राज्य सरकार से मदद मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि शहीद की शहादत को किसी भी तरीके से बेकार नहीं होने दिया जाएगा। उसकी शहादत को जनपदवासी याद रखें इसके लिए गांव में शहीद के नाम से एक पार्क और गांव के मुख्य मार्ग पर शहीद द्वार बनवाया जाएगा।

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