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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने आम के बौर को बचाने के लिए जारी की एडवाइजरी

कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉक्टर डी.आर. सिंह के निर्देश के क्रम में आज विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार (समन्वयक) डॉ. ए.के. सिंह ने बागवानी करने वालों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में आम में मंजर (बौर) फरवरी के द्वितीय सप्ताह में आना प्रारंभ कर देता है। उन्होंने बताया कि यह आम की विभिन्न प्रजातियों तथा उस समय के तापक्रम पर निर्धारित होता है। उन्होंने बताया कि जब आम के पौधों पर मंजर (बौर) आते हैं। तो हापर या भुनगा कीट बहुत संख्या में आक्रमण करते हैं। यह भुनगा कीट मंजर (बौर) से रस चूसते हैं। फलत: मंजर (बौर) झड़ जाता है और आम का उत्पादन कम हो जाता है।

डॉ सिंह ने बागवानों को सलाह दी है कि प्रति मंजर (बौर) 10 से 12 भुनगा कीट दिखाई दे तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 1 मिलीलीटर दवा प्रति 2 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर दें। उन्होंने बताया कि खर्रा रोग प्रबंधन के लिए मंजर (बौर) आने के पूर्व घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। उन्होंने सलाह दी है कि जब आम में पूरी तरह फल लग जाए तब इस रोग के प्रबंधन के लिए हेक्साकोनाजोल 1 मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ खलील खान ने बताया कि जब तापक्रम 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है। तब इस रोग की उग्रता में कमी अपने आप आने लगती है। डॉक्टर खान ने बताया कि आम के छोटे फलों को गिरने से रोकने के लिए आवश्यक है कि प्लेनोफिक्स 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर दें। उन्होंने बताया की आम में जब फल मटर के दाने के समान हो जाएं। तो बाग में सिंचाई अवश्य कर देनी चाहिए। तथा मिट्टी में नमी बरकरार रखना चाहिए । उसके पहले सिंचाई न करें अन्यथा फल गिर जाते हैं।

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