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लोक जीवन फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘आरोग्य पाकशाला’ सम्पन्न

लखनऊ। लोक जीवन फाउण्डेशन के द्वारा हिंदी मीडिया सेंटर, लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय ‘आरोग्य पाकशाला’ का रविवार को समापन हुआ। इस अवसर पर स्वास्थ्य, आयुर्वेद, पारंपरिक चिकित्सा एवं जैविक जीवनशैली से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन दिवस पर एक्यूप्रेशर थेरेपी पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को बिना दवा उपचार की इस पद्धति की उपयोगिता, लाभ एवं रोग निवारण में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सत्र के दौरान बताया गया कि किस प्रकार एक्यूप्रेशर के माध्यम से शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव डालकर रोगों की पहचान एवं उपचार संभव है।

इसके साथ ही उद्यानिकी विभाग के उप निदेशक, डॉ. डी. के. वर्मा द्वारा हर्बल एवं औषधीय पौधों पर आधारित एक महत्वपूर्ण सत्र लिया गया। उन्होंने औषधीय पौधों की पहचान, उनके औषधीय गुण, उपयोग, संरक्षण एवं उनके व्यावसायिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि औषधीय पौधे न केवल स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं, बल्कि आजीविका के सशक्त माध्यम भी बन सकते हैं। इसके पश्चात डॉ. दया श्रीवास्तव, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया (सीतापुर) ने जैविक खेती एवं वैल्यू एडिशन विषय पर अपना सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जैविक खेती अपनाकर किस प्रकार किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है तथा कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर उन्हें बाजार से जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण संभव है।कार्यक्रम के दौरान डॉ. वंदना वर्मा (आयुर्वेदिक चिकित्सक ) ने अपने संबोधन में आयुर्वेदिक चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज आवश्यकता है कि लोग एलोपैथी पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर लौटें, क्योंकि यह पद्धति शरीर को जड़ से स्वस्थ करने में सहायक है।

समापन समारोह में सभी सम्मानित वैद्याचार्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान डॉ. दया श्रीवास्तव, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र कटिया सीतापुर, अरिमर्दन सिंह (पूर्व अपर महानिदेशक, पीआईबी–भारत सरकार) एवं लोक जीवन फाउण्डेशन के संस्थापक डॉ. राजेश वर्मा के द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में विशेष योगदान देने वाले रसोइयों रघुराज एवं प्रमोद को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने मोटे अनाजों से बने पारंपरिक एवं स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन तैयार किए, जिन्हें आगंतुकों द्वारा सराहा गया। प्रतिभागियों ने अनुभवी वैद्याचार्यों से नाड़ी परीक्षण कराया तथा वैद्य एवं एक्यूप्रेशर विशेषज्ञों द्वारा रोगों की पहचान, जीवनशैली सुधार एवं उचित खान-पान संबंधी परामर्श प्राप्त किया। विशेष रूप से दैनिक जीवन में मोटे अनाजों के सेवन को अपनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम संचालिका प्रिया वर्मा ने अपने संबोधन में कहा, वैद्याचार्यों का यह पारंपरिक ज्ञान आने वाली पीढ़ियों को हस्तांतरित किया जाना चाहिए, ताकि हमारी भावी पीढ़ियाँ इसे एक अमूल्य विरासत के रूप में संजोकर आगे बढ़ा सकें।

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