सुल्तानपुर। कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (केएनआईटी) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा शुक्रवार को सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सेमिनार हॉल में एलुमनाई टॉक:सिविल इंजीनियरिंग 2.0 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1997 बैच के पूर्व छात्र (एलुमनाई) एवं वर्तमान में टीसीएस, लखनऊ में वरिष्ठ सलाहकार (सीनियर कंसल्टेंट) के पद पर कार्यरत संदीप तिवारी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल शैक्षणिक ज्ञान भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता, बल्कि विषय ज्ञान के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रभावी उपयोग, सॉफ्ट स्किल्स और निरंतर सीखने की आदत ही सफलता की कुंजी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. यू. के. महेश्वरी के स्वागत एवं संबोधन से हुआ। उन्होंने पूर्व छात्रों के अनुभवों को वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। इसके पश्चात प्रो. अनुपम वर्मा ने मुख्य वक्ता संदीप तिवारी का परिचय देते हुए उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संदीप तिवारी ने केएनआईटी से वर्ष 1997 में बी.टेक. करने के बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट में एम.टेक. किया और वर्तमान में टीसीएस, लखनऊ में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रोफेसर अनुपम वर्मा ने सिलेबस, ब्लॉकचेन, सेंसर, आईओटी और एआई के प्रति भागीदारी को फोकस किया। संदीप तिवारी ने सिविल इंजीनियरिंग के द्वितीय, तृतीय एवं अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रतिदिन सीखना, समय के अनुसार अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाना, रचनात्मक एवं आत्मविश्वासी व्यक्तित्व विकसित करना तथा परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना आवश्यक है। उन्होंने सफलता के चार मूल मंत्र बताते हुए कहा— प्रतिदिन सीखें, अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाएं, रचनात्मक एवं आत्मविश्वासी बनें तथा परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को सबसे बेहतर ढंग से ढालें। उन्होंने कहा कि भविष्य सबसे शक्तिशाली या सबसे तेज व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यक्ति का है जो परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को सबसे बेहतर ढंग से ढाल लेता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्ममंथन करने, सॉफ्ट स्किल्स विकसित करने, प्रभावी संवाद क्षमता बढ़ाने और जीवनभर सीखते रहने का प्रेरित किया। एआई के उपयोग पर उन्होंने कहा कि यह ज्ञान का विकल्प नहीं बल्कि ज्ञान को और अधिक प्रभावी बनाने वाला माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि एआई को हमेशा स्पष्ट, सटीक और ज्ञानवर्धक प्रॉम्प्ट दें, क्योंकि जैसा इनपुट देंगे, वैसा ही परिणाम मिलेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक मुखर बनने और एआई को सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ जोड़कर उसका रचनात्मक उपयोग करने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विशेष रूप से द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सभी प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। चौथे वर्ष के रक्तिम और अन्य लोग इस कार्यक्रम के आयोजन सदस्य थे। प्रोफेसर अनुपम वर्मा समन्वयक थे और प्रोफेसर रामाशीष और प्रोफेसर शुभ्रा सह समन्वयक थे।

