लखनऊ। जिस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर सफर को तेज और आसान बनाने का सपना दिखाया गया था, वह उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने की घटनाओं को लेकर सवालों में आ गया। महज करीब 20 दिनों में पांच जगह सड़क धंसने के बाद अब NHAI ने बड़ा फैसला लिया है। मरम्मत का काम पूरा होने तक एक्सप्रेस वे पर टोल वसूली पूरी तरह बंद रहेगी।
यानी इस दौरान लखनऊ से कानपुर जाने वाले यात्रियों को 275 रुपये का एक तरफ का टोल नहीं देना होगा। हालांकि, टोल से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई निर्माण एजेंसी से कराने की बात कही गई है।
4,200 करोड़ से ज्यादा खर्च, फिर 20 दिन में क्यों धंसी सड़क?
करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 4,200 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। चार पहिया वाहनों के लिए एक तरफ का टोल 275 रुपये रखा गया था।
लेकिन उद्घाटन के बाद लगातार सड़क धंसने की घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए। करीब 20 दिनों में पांच जगह सड़क धंसने की सूचना के बाद NHAI को कार्रवाई करनी पड़ी।
एक अधिकारी हटे, दूसरे को चार्जशीट
मामले में NHAI ने अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करनी शुरू कर दी है। क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के मुताबिक, लापरवाही के चलते मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया गया है। उन्हें मुख्यालय भेज दिया गया है।
उनकी जगह बरेली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नवरतन को लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट दी गई है। उनके कार्यकाल में एक्सप्रेस वे का अधिकांश निर्माण कार्य हुआ था।
PNC इंफ्राटेक अब NHAI के टेंडर में नहीं ले सकेगी हिस्सा
सड़क निर्माण करने वाली PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। कंपनी को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इसका सीधा असर यह होगा कि वह भविष्य में NHAI के टेंडरों में हिस्सा नहीं ले सकेगी।
कंपनी की गारंटी जब्त करने, जिम्मेदार कर्मचारियों पर तीन साल तक प्रतिबंध और एजेंसी की रेटिंग डाउनग्रेड करने जैसी कार्रवाई भी की गई है।
इतना ही नहीं, सड़क के प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च भी एजेंसी को खुद उठाना होगा।
तीन इंजीनियर पहले ही हटाए जा चुके
सड़क धंसने के मामले में निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता टीम के लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को पहले ही परियोजना से हटाया जा चुका है।
तीनों को दो साल तक MoRTH, NHAI और NHIDCL की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया है।
IIT खड़गपुर की टीम खोजेगी सड़क धंसने की असली वजह
अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद सड़क इतनी जल्दी क्यों धंसने लगी?
इसका जवाब तलाशने के लिए एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच शुरू हो गई है। सड़क की सतह और खुरदरेपन की जांच लेजर प्रोफिलोमीटर से की जा रही है।
इसके अलावा IIT खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की टीम भी जांच कर रही है। टीम सड़क धंसने के मूल कारण का पता लगाएगी और जरूरी सुधार के सुझाव देगी। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
अभी टोल नहीं, लेकिन नुकसान की भरपाई एजेंसी से
मरम्मत कार्य के दौरान यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। एक्सप्रेस वे पर काम पूरा होने तक टोल पूरी तरह फ्री रहेगा।
हालांकि, टोल बंद होने से NHAI को होने वाले राजस्व नुकसान का बोझ सरकारी खजाने पर डालने के बजाय इसकी भरपाई PNC इंफ्राटेक से कराने की तैयारी है।
सबसे बड़ा सवाल: 4,200 करोड़ के प्रोजेक्ट में इतनी जल्दी सड़क कैसे धंस गई?
अब सबकी नजर IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट से यह साफ होगा कि सड़क धंसने के पीछे डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता, सामग्री या किसी अन्य तकनीकी वजह की भूमिका थी या नहीं। इसके बाद आगे की कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है।

