बाराबंकी। भारत सरकार के राष्ट्रीय मखाना बोर्ड द्वारा संचालित ‘मखाना विकास परियोजना’ के अंतर्गत, जनपद बाराबंकी के मसौली ब्लॉक स्थित ग्राम धानकुट्टी में ‘मखाना की वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण और रोजगार के अवसर’ विषय पर एक दिवसीय जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र-II (KVK-II), कटिया, सीतापुर द्वारा उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) और प्रवृद्धा फाउंडेशन के समन्वय से किया गया।मछली के साथ मखाना की खेती से दोगुना मुनाफा कार्यक्रम का आयोजन और मेजबानी प्रगतिशील मत्स्य किसान डॉ. सुरेश शर्मा के फार्म पर की गई। उन्होंने उपस्थित किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए मछली पालन के साथ मखाना की खेती (सह-फसली/Intercropping) करने पर जोर दिया, ताकि एक ही तालाब से दोहरा मुनाफा कमाया जा सके।
उद्यमिता और शंका समाधान :
KVK-II सीतापुर के अध्यक्ष डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने किसानों को मखाना की खेती से जुड़कर उद्यमी (Entrepreneur) बनने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्होंने किसानों के मन में मखाना की खेती को लेकर उठ रहे सभी सवालों और शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया। वैज्ञानिक तकनीक और जलभराव का सदुपयोग: KVK-II के वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर ने मखाना की वैज्ञानिक खेती की उन्नत तकनीकों और इसके प्रसंस्करण (Processing) की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे किसान बेकार पड़ी जलभराव (Waterlogged) वाली स्थिति का लाभ उठाकर अपनी आय में भारी वृद्धि कर सकते हैं।
निर्यात की संभावनाएं :
इस कार्यक्रम में लोक जीवन फाउंडेशन, लखनऊ के संस्थापक डॉ. राजेश वर्मा ने अपना विशेष सहयोग प्रदान किया। उन्होंने मखाना के अंतरराष्ट्रीय बाजार और इसके निर्यात (Export potential) की अपार संभावनाओं पर चर्चा करते हुए किसानों का विजन बड़ा करने का प्रयास किया।महिला सशक्तिकरण और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। लोक जीवन फाउंडेशन की प्रिया वर्मा और राखी धीमान ने ग्रामीण महिलाओं को मखाना उत्पादन और इसके मूल्य संवर्धन (Value Addition) के जरिए अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसरों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर स्थानीय नेतृत्व का भी पूरा समर्थन मिला। ग्राम पंचायत रामपुर कटरा के प्रधान नियाज़ अहमद और प्रमुख समाजसेवी मतलूब अहमद ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए किसानों का उत्साह बढ़ाया। इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में 51 किसानों और महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और मखाना की खेती को एक नए व्यवसाय के रूप में अपनाने के प्रति सकारात्मक रुझान दिखाया।

