लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को केवल पशुपालन तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास और ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ने की पहल अब व्यापक परिणाम देने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित किए गए मॉडल के तहत देसी गायों से तैयार उत्पाद देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
प्रदेश में पंचगव्य और आयुर्वेद आधारित उत्पादों का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। गोघृत, गोमूत्र अर्क, ब्राह्मी घृत, च्यवनप्राश, शतधौता घृत और अन्य पारंपरिक उत्पादों की मांग विदेशों में भी देखने को मिल रही है। प्राकृतिक और रसायनमुक्त उत्पादों के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि ने इन उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार किए हैं।
सरकार की नीति का सबसे बड़ा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, जहां गो आधारित उत्पादों के निर्माण ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। स्वयं सहायता समूह, गौशालाएं और छोटे उद्यमी इस क्षेत्र में सक्रिय होकर आय के नए स्रोत विकसित कर रहे हैं। इससे गो संरक्षण को आर्थिक आधार मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
गाजियाबाद के युवा उद्यमी असीम रावत इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरे हैं। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े रहने के बाद उन्होंने देसी गायों के संरक्षण और उनसे जुड़े उत्पादों के व्यवसाय को अपनाया। आज उनका HETHA ब्रांड देश के साथ विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुका है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ गो आधारित उद्योग ग्रामीण भारत में आर्थिक परिवर्तन का मजबूत माध्यम बन सकता है।
उत्तर प्रदेश का यह प्रयोग अब अन्य राज्यों का भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। विभिन्न राज्यों से किसान, गौशाला संचालक और उद्यमी यहां आकर गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो आधारित उद्योगों के संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इससे प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार सरकार उन्नत देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए अनुदान योजनाएं संचालित कर रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी नस्लों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का यह मॉडल ग्रामीण विकास, जैविक कृषि और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश की गो-आधारित अर्थव्यवस्था अब देशभर में चर्चा का विषय बनती जा रही है।

