कानपुर नगर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में आयोजित दो दिवसीय कॉर्पोरेट–शैक्षणिक सम्मेलन ‘समन्वय 2025’ में बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित रहे।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘विचारों को जगाना, नवाचार को तेज़ करना’ रहा। जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग क्षेत्र और शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख नेताओं को एक साझा मंच पर लाकर ऐसे नवाचारों को गति देना था, जो समाज और देश के लिए वास्तविक बदलाव ला सके। समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सस्टेनेबिलिटी और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। यह विषय न केवल भारत के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को आकार देते हैं बल्कि तकनीकी उन्नति को भी दर्शाते हैं।
समिट में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री के विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भरता के विजन को पूरा करने के लिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि नई प्रौद्योगिकियों का विकास और अनुप्रयोग हमारे द्वारा किया जाए। मेड-टेक, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाना हमारी प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में इन लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, और अब हमें इसे और तेज करने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास, विशेष रूप से डीपटेक में, इस मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और शीघ्र ही हम तीसरे स्थान पर होंगे। ‘विकसित भारत’ का अर्थ है ‘आत्मनिर्भर भारत’—हर क्षेत्र में सशक्त, सक्षम और अग्रणी। नए भारत की सामरिक चुनौतियों का सामना हमारे युवाओं और आईआईटी जैसे संस्थानों को नई तकनीक विकसित करके करना होगा। आज का समय प्रतिस्पर्धा का है, और हमें हर क्षेत्र में नेतृत्व स्थापित करना है।
उन्होंने आगे कहा, मुझे प्रसन्नता है कि आईआईटी कानपुर जैसे संस्थान उत्तर प्रदेश को नई तकनीकी शक्ति प्रदान कर रहे हैं। विशेष रूप से क्वांटम कंप्यूटिंग, डीपटेक, ड्रोन, मेडटेक और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में यह संस्थान महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। मुझे विश्वास है कि उद्योग और अकादमिक जगत के सहयोग से उत्तर प्रदेश, ‘नए भारत’ की प्रगति में अग्रणी राज्य बनेगा। हमारी इंडस्ट्री को नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देना चाहिए। हाल के समय में साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है और इस क्षेत्र में आईआईटी कानपुर की प्रमुख भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, मैं मानता हूं कि जैसे ‘समन्वय’ कार्यक्रम में आईआईटी कानपुर ने नेतृत्व किया है, वैसे ही उसे ‘डीपटेक 2025 समिट’ का भी नेतृत्व करना चाहिए। आईआईटी कानपुर को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश की लीडरशिप स्थापित करनी है। साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान केवल तभी संभव है जब उद्योग और संस्थान मिलकर नई तकनीक विकसित करें। विकसित भारत के लिए हमें हर क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश आज देश में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। हमें आत्ममंथन की भी आवश्यकता है—जहां हम चेतन, अचेतन और अवचेतन मन का सामंजस्य तकनीकी क्षेत्र में सीखें और उसे राष्ट्रनिर्माण में लगाएं।
इस अवसर पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर डॉ. हैरिक विन ने आईआईटीके समन्वय 2025 में दर्शकों को एक गतिशील भविष्य के दृष्टिकोण से प्रेरित किया, जहां लोगों पर केंद्रित एआई और मानव प्रतिभा एक साथ मिलकर नवाचार के लिए काम करते हैं जो समावेशी, अनुकूल और प्रभावशाली हों।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि, आईआईटी कानपुर ने हमेशा यह प्रयास किया है कि वह अपने तकनीकी ज्ञान को समाजोपयोगी बना सके। उन्होंने बताया कि संस्थान के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और सस्टेनिबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में गहन शोध और अनुभव है। यह तभी संभव हो पाया है जब कॉर्पोरेट और सरकार दोनों ने मिलकर इसे सहयोग और समर्थन दिया है। साथ ही उन्होंने संस्थान के वाधवानी सेंटर फॉर डिवेलपिंग इंटेलिजेंट सिस्टम्स और ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन जैसे रिसर्च केंद्रों के कार्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि ये केंद्र तकनीक के जरिए भारत की प्रमुख समस्याओं का समाधान तलाशने की दिशा में काम कर रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान कई पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें देश की जानी-मानी कंपनियों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समिट के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) भी हस्ताक्षरित हुआ। यह समझौता आईआईटी कानपुर के ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीच हुआ, जिसके तहत दोनों संस्थाएं मिलकर शहरी नियोजन की चुनौतियों को हल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करेंगी। इस परियोजना के अंतर्गत उच्च-गुणवत्ता वाली वायु गुणवत्ता मैपिंग, शहरी बाढ़ की भविष्यवाणी, हरित क्षेत्र की योजना, कार्बन उत्सर्जन का मूल्यांकन, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार, और नागरिक भागीदारी को तकनीक के ज़रिए बेहतर बनाने जैसे कार्य किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्मार्ट सिटी को ना केवल तकनीकी बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से भी संतुलित और सतत करना है।

