लखनऊ। पंचायती राज मंत्री ने कहा कि मातृभूमि योजना केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और पंचायत के बीच विश्वास, सहभागिता और जिम्मेदारी को मजबूत करने का अभियान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब समाज स्वयं पंचायतों के विकास में भागीदारी करता है, तो योजनाएं जन आंदोलन का रूप ले लेती हैं।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार पंचायतों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और जनसुविधाओं से युक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मातृभूमि योजना के जरिए प्रवासी भारतीय, समाजसेवी, उद्यमी और ग्रामीण नागरिक स्वेच्छा से अपनी पंचायतों के विकास में योगदान दे रहे हैं।
अब तक प्रदेश के 11 जनपदों में 21 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी कुल लागत करीब 2.74 करोड़ रुपये है। वहीं 10 जनपदों में लगभग 3.16 करोड़ रुपये की 13 परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इसके अलावा 17 जनपदों से 33 नई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
योजना के तहत सीसी रोड, इंटरलॉकिंग रोड, स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरा, खेल परिसर, शेड, फेंसिंग, डिजिटल सुविधाएं और आर्ट अकादमी जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
बुलंदशहर के संजीव राजौरा ने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए करीब 1.07 करोड़ रुपये का सहयोग दिया, जबकि उन्नाव की फुट पेंटर शीला ने आर्ट अकादमी के लिए लगभग 26.53 लाख रुपये का योगदान देकर प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। बागपत में सीसी रोड और पंचायत स्तर पर विकसित हो रहे खेल परिसर ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर को दर्शा रहे हैं।

