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अभिनेता अमजद ख़ान, जिसने बॉलीवुड सिनेमा पर छोड़ी अमिट छाप

मुंबई। ‘यहाँ से 50-50 कोस दूर गाँव में..जब बच्चा रात को रोता है तो माँ कहती है बेटे सो जा..सो जा नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा’। शोले फ़िल्म में बोला गया अभिनेता अमजद ख़ान का ये डायलॉग आज भी लोगों के ज़ुबान पर है। वर्ष 1975 में ‘शोले’ फ़िल्म के प्रसिद्ध खलनायक ‘गब्बर सिंह’ की भूमिका से उन्हें अप्रतिम ख्याति मिली। उनका यह किरदार इतना दमदार और यादगार था कि उन्होंने रातों रात खुद को हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा विलेन साबित कर दिया।  बावजूद इसके उन्होंने कॉमेडी और पॉजिटिव रोल भी निभाए और यह साबित किया कि उनका टैलेंट सिर्फ डर दिखाने तक सीमित नहीं था। फिल्म ‘कुर्बानी’ में उनका किरदार दर्शकों को हंसाने और मनोरंजन करने वाला था। इसी तरह ‘लव स्टोरी’ और ‘उत्सव’ जैसी फिल्मों में उन्होंने पॉजिटिव रोल से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने अपने करियर में ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘मुक़द्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘कालिया’, ‘चमेली की शादी’,  ‘उमराव जान’, ‘मिस्टर नटवरलाल’ जैसी 130 से अधिक फ़िल्मों में अभिनय  किया।  

अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को ब्रिटिश भारत के पेशावर में (अब पाकिस्तान) हुआ था।  उनका परिवार फिल्मी बैकग्राउंड से था। उनके पिता जयंत अभिनेता थे। बचपन से ही अमजद को एक्टिंग का बहुत शौक था और उन्होंने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने 11 साल की उम्र में फिल्म ‘नाजनीन’ में बाल कलाकार के रूप में काम किया। इसके बाद 17 साल की उम्र में फिल्म ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ में नजर आए। ये शुरुआती फिल्में उनके करियर के लिए पहला कदम साबित हुईं।

अमजद खान ने 27 जुलाई 1992 को दुनिया को अलविदा कह दिया।  उनकी याद आज भी हिंदी सिनेमा में गब्बर सिंह के रूप में जिंदा है।

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