लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कानपुर से कबरई के बीच 117.70 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। 7,145.14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला नया विकास गलियारा मानी जा रही है।
नई सड़क तैयार होने के बाद कानपुर से कबरई तक का सफर, जो फिलहाल करीब साढ़े तीन घंटे में पूरा होता है, घटकर लगभग डेढ़ घंटे का रह जाएगा। इतना ही नहीं, वाहनों की औसत रफ्तार 30–50 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 80–100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
यह परियोजना प्रधानमंत्री गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत विकसित की जाएगी और आगे चलकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, कानपुर रिंग रोड तथा भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ उद्योगों, कृषि आधारित कारोबार, खनन क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा।
परियोजना के तहत 16 बड़े पुल, एक रेलवे ओवरब्रिज और दोनों ओर करीब 12 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा, जिससे स्थानीय यातायात और हाईवे ट्रैफिक अलग-अलग संचालित हो सकेगा। सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी इसे आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह हाईवे प्रदेश में निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार यह परियोजना ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि परियोजना ‘बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर’ मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसमें 117.70 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड निर्माण और 123.86 किलोमीटर के मौजूदा मार्ग का संचालन एवं रखरखाव भी शामिल है।
सरकार का मानना है कि यह नया हाईवे केवल यात्रा को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि 16 आर्थिक नोड्स, 9 सामाजिक नोड्स और 10 लॉजिस्टिक्स नोड्स—जिनमें रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट भी शामिल हैं—को बेहतर कनेक्टिविटी देकर पूरे क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर खोलेगा।

