सुल्तानपुर। कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (KNIT), सुल्तानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सेमिनार हॉल में मंगलवार को “Implementing Python in Civil Engineering” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को सिविल इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों में पायथन प्रोग्रामिंग के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना था।
कार्यशाला श्रृंखला के संयोजक प्रो. अनुपम वर्मा रहे। विषय विशेषज्ञ के रूप में KNIT के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रो. राज श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को पायथन के विभिन्न अनुप्रयोगों की जानकारी दी। उन्होंने पायथन का परिचय देने के साथ सिविल इंजीनियरिंग में इसके उपयोग और मूलभूत अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा की।
प्रो. श्रीवास्तव ने स्ट्रक्चरल एनालिसिस, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, हाइड्रोलिक्स एवं वाटर इंजीनियरिंग में पायथन के अनुप्रयोगों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। कार्यशाला में बहुमंजिला भवन के विश्लेषण से संबंधित केस स्टडी भी प्रस्तुत की गई। विद्यार्थियों को किसी इंजीनियरिंग समस्या की पहचान करने से लेकर उसके समाधान तक अपनाए जाने वाले प्रायोगिक वर्कफ्लो की जानकारी दी गई।
इस दौरान विद्यार्थियों को पाइथन सीखने की उपयुक्त राह, इसके भविष्य की संभावनाओं और सिविल इंजीनियरिंग में इसके बढ़ते महत्व से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पाइथन के व्यावहारिक उपयोग से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे।
प्रो. अनुपम वर्मा ने द्वितीय, तृतीय एवं अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सिविल इंजीनियरिंग में पायथन का उपयोग जटिल इंजीनियरिंग समस्याओं के विश्लेषण, स्वचालन और डेटा आधारित समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रोग्रामिंग कौशल विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के लिए तैयार करने में सहायक होंगे।
विभागाध्यक्ष डॉ. यू. के. माहेश्वरी ने कार्यक्रम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिविल इंजीनियरिंग में पायथन जैसी आधुनिक तकनीकों का समावेश वर्तमान समय की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यशाला में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर रुचिन अग्रवाल, प्रोफेसर राम आशीष प्रजापति, प्रोफेसर शिवम् श्रीवास्तव, प्रोफेसर चत्रभुज और प्रोफेसर शुभ्रा उपाध्याय सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को पारंपरिक सिविल इंजीनियरिंग ज्ञान के साथ प्रोग्रामिंग और आधुनिक तकनीकी कौशल को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

