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62 साल पुराने गाने ने फिर मचा दिया धमाल: कैसे ‘मेरे महबूब कयामत होगी’ Gen Z का नया एंथम बन गया?

मोनिका वर्मा

1964 में रिलीज हुआ एक दर्दभरा फिल्मी गीत… जिसे कभी टूटे दिल वालों की आवाज माना जाता था। लेकिन 2026 में वही गाना सोशल मीडिया पर एक बिल्कुल नए अंदाज में लौट आया है। इंस्टाग्राम खोलते ही अगर हर दूसरी रील में “तेरी गलियों में मोहब्बत होगी…” सुनाई दे रही है, तो यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि इंटरनेट की उस ताकत का उदाहरण है जो दशकों पुराने कंटेंट को भी नई जिंदगी दे देती है।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार गाना वायरल उसकी कहानी की वजह से नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल की वजह से हुआ।

दर्द से मीम तक का सफर

किशोर कुमार की आवाज में गाया गया “मेरे महबूब कयामत होगी” कभी अधूरे प्यार की सबसे लोकप्रिय धुनों में गिना जाता था। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में गानों का मतलब अक्सर बदल जाता है।

आज इस गाने का सबसे ज्यादा इस्तेमाल रोमांटिक वीडियो के लिए नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ ट्रांजिशन, फनी मोमेंट्स, कॉलेज लाइफ, ट्रैवल और ग्रुप रील्स में हो रहा है। यानी जो गीत कभी उदासी का प्रतीक था, वही अब इंटरनेट पर मस्ती का बैकग्राउंड म्यूजिक बन चुका है।

एक प्रोटेस्ट से शुरू हुआ नया ट्रेंड

इस ट्रेंड की नई लहर की शुरुआत तब हुई, जब नीट परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ कंटेंट क्रिएटर्स ने जंतर-मंतर पर इसी गाने की धुन पर एक रील बनाई। गंभीर माहौल और हल्के-फुल्के प्रेजेंटेशन के इस विरोधाभास ने लोगों का ध्यान खींच लिया।

रील देखते-देखते लाखों लोगों तक पहुंची और फिर उसी ऑडियो पर हजारों नए वीडियो बनने लगे। सोशल मीडिया के एल्गोरिद्म ने इसे और तेजी से आगे बढ़ाया। देखते ही देखते यह ऑडियो इंस्टाग्राम के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ट्रेंड्स में शामिल हो गया।

लोगों को क्यों पसंद आ रहा है यह गाना?

हर वायरल ट्रेंड के पीछे सिर्फ एल्गोरिद्म नहीं होता, भावना भी होती है। इस गाने के साथ दो पीढ़ियां जुड़ गई हैं।

  • बड़ी उम्र के लोगों के लिए यह किशोर कुमार की यादें ताजा करता है।
  • वहीं Gen Z के लिए यह एक “एस्थेटिक” और “नॉस्टैल्जिक” ऑडियो बन गया है, जिसका इस्तेमाल वे अपनी क्रिएटिव रील्स में कर रहे हैं।

यही वजह है कि यह ट्रेंड सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं रहा। कई बड़े कलाकार, अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर्स भी इसी ऑडियो पर वीडियो बनाने लगे।

टिकटॉक की यादें फिर हुईं ताजा

जो लोग 2018 और 2019 के टिकटॉक दौर का हिस्सा रहे हैं, उनके लिए यह ट्रेंड किसी टाइम मशीन से कम नहीं है।

उसी दौर में इस गाने पर बने ट्रांजिशन वीडियो ने लाखों व्यूज बटोरे थे। खासतौर पर Team 07 और उस समय के कई लोकप्रिय क्रिएटर्स ने इस ऑडियो को नई पहचान दी थी। भारत में टिकटॉक बंद होने के बाद यह ट्रेंड भी धीरे-धीरे गायब हो गया, लेकिन इंटरनेट ने उसे पूरी तरह भुलाया नहीं। अब इंस्टाग्राम रील्स ने उसी याद को नए प्लेटफॉर्म पर फिर जिंदा कर दिया है।

इंटरनेट का नया नियम: पुराना ही नया है

सोशल मीडिया की सबसे दिलचस्प बात यही है कि यहां कोई भी चीज हमेशा के लिए पुरानी नहीं होती। कभी 90 के दशक का गाना ट्रेंड करता है, कभी किसी पुराने विज्ञापन का डायलॉग और कभी 60 साल पहले रिकॉर्ड हुई धुन करोड़ों लोगों की प्लेलिस्ट में वापस आ जाती है। एल्गोरिद्म को उम्र से फर्क नहीं पड़ता। अगर कंटेंट लोगों को जोड़ रहा है, तो वह फिर से वायरल हो सकता है।

क्या इससे पुराने बॉलीवुड संगीत को नई पहचान मिलेगी?

संभावना पूरी है। पिछले कुछ वर्षों में “मेरा दिल ये पुकारे आजा”, “गुलाबी आंखें”, “लग जा गले” और अब “मेरे महबूब कयामत होगी” जैसी कई पुरानी धुनें सोशल मीडिया की वजह से नई पीढ़ी तक पहुंची हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई युवा पहले इन गानों का नाम तक नहीं जानते थे, लेकिन रील्स के जरिए उन्होंने इन्हें सुनना शुरू किया। यानी सोशल मीडिया सिर्फ ट्रेंड नहीं बना रहा, बल्कि पुराने संगीत को नई ऑडियंस भी दे रहा है।

कहा जा सकता है,“मेरे महबूब कयामत होगी” की दूसरी पारी यह साबित करती है कि अच्छे संगीत की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले लोग इस गाने को रेडियो और कैसेट पर सुनते थे, फिर टिकटॉक पर इसे ट्रांजिशन वीडियो का हिस्सा बनाया गया और अब इंस्टाग्राम रील्स ने इसे फिर से करोड़ों लोगों तक पहुंचा दिया है।

एक दर्दभरा गीत अब इंटरनेट संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। शायद यही डिजिटल दौर की सबसे दिलचस्प बात है—यहां यादें भी ट्रेंड करती हैं और संगीत भी।

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