मुंबई। 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में इस वर्ष कंट्री फोकस जापान रविवार कोविशेष आकर्षण का केंद्र बना। जापानी सिनेमा की दो प्रमुख फिल्मों—’टाइगर’ और ‘सीसाइड सेरेन्डिपिटी’—की टीमों ने एक विशेष रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से संवाद किया। कलाकारों और क्रू सदस्यों ने अपनी रचनात्मक यात्रा, विषयगत प्रेरणाओं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर जापान के प्रतिनिधित्व के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए। उनकी इस बातचीत ने कंट्री फोकस जापान खंड के तहत प्रस्तुत फिल्म शोकेस को और भी समृद्ध बना दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत दोनों फिल्मों के ट्रेलर की स्क्रीनिंग से हुई, जिसके तुरंत बाद ‘टाइगर’ की टीम ने मंच संभालते हुए मीडिया के समक्ष अपनी फिल्म का परिचय प्रस्तुत किया।
फिल्म ‘टाइगर’ एक 35 वर्षीय मालिश करने वाले की कहानी बयान करती है, जिसका अपनी बहन के साथ संपत्ति के स्वामित्व को लेकर बढ़ता झगड़ा उसे ऐसे मोड़ पर पहुंचा देती है, जहां पर सही और गलत की सीमाएं धुंधली पड़ने लगती हैं। फिल्म न केवल पारिवारिक संघर्ष को उभारती है, बल्कि एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है। यह कहानी पहचान, अधिकारों और सामाजिक स्वीकृति जैसे संवेदनशील मुद्दों को गहराई से उठाती है।
फिल्म के निर्देशक अंशुल चौहान ने मीडिया को संबोधित करते हुए निर्माण प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली रचनात्मक और भावनात्मक जटिलताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर काम करते समय उन्हें शुरुआत में दर्शकों की प्रतिक्रिया को लेकर संदेह था। अंशुल चौहान ने कहा कि एक गैर-एलजीबीटीक्यू फिल्म निर्माता होने के बावजूद एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के मुद्दों को स्क्रीन पर प्रस्तुत करना अत्यधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की मांग करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे विषयों को चित्रित करते समय समुदाय के प्रति सम्मान बनाए रखना सबसे आवश्यक है।
मीडिया से बातचीत के दौरान ‘सीसाइड सेरेन्डिपिटी’ की कार्यकारी निर्माता तोमोमी योशिमुरा ने अपने अनुभवों और फिल्म की रचनात्मक यात्रा को साझा किया। उन्होंने भारतीय दर्शकों से मिली जबरदस्त सराहना के लिए बड़ा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी गर्मजोशी और उत्साह ने इफ्फी में फिल्म की प्रस्तुति को बेहद खास तथा यादगार बना दिया।
बातचीत के दौरान तोमोमी ने फिल्म की मूल विषयगत बातों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य बच्चों और बड़ों के बीच मौजूद पीढ़ीगत अंतर को पाटना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि फिल्म ऐसी कहानी पेश करती है, जो विभिन्न आयु वर्गों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देती है और ऐसे दृष्टिकोण सामने लाती है, जो युवाओं एवं बुजुर्गों के लिए समान रूप से प्रासंगिक तथा सार्थक हैं।
एक शांत समुद्र तटीय शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘सीसाइड सेरेन्डिपिटी’ उस समुदाय की कहानी बयां करती है, जहां वर्षों से बसे लोग कलाकारों के आगमन और कई अप्रत्याशित घटनाओं के बाद से अचानक बदलाव का सामना करते हैं। माध्यमिक विद्यालय के छात्र सोसुके और निरंतर रूप से बदलते शहर के इर्द-गिर्द घूमती यह कथा मार्मिक दृश्यों के माध्यम से आगे बढ़ती है, जो बच्चों के दृढ़ संकल्प तथा वयस्कों की अर्थ की खोज को प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है। अपूर्ण लेकिन बेहद संवेदनशील चरित्रों को उकेरती यह फिल्म प्रेम, संबंध और मानवीय भावनाओं का उम्दा उत्सव है। टीम ने आशा जताई कि फिल्म महोत्सव के दौरान दर्शकों के साथ गहराई से जुड़ाव बनाए रखेगी।

