लखनऊ। इतिहास संकलन समिति, अवध प्रांत के उत्तर भाग (लखनऊ) की बैठक अलीगंज में राम राम बैंक चौराहे के पास केसरिया भवन, द्वितीय तल में आहूत की गई है। बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह संगठन सचिव संजय श्रीहर्ष मिश्र ने की तथा बैठक में डॉ. मुकेश कुमार, प्रचार प्रमुख, अवध प्रांत, अखिलेश मिश्र, अर्पित मिश्र, सुशील कुमार त्रिपाठी, आचार्य शिवाकांत मिश्र, रूपा श्रीवास्तव, डॉ. साधना द्विवेदी, डॉ. मुनेंद्र सिंह एवं डॉ. अरुन कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मनीष महर्षि उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सह संगठन सचिव श्रीहर्ष ने सभी सदस्यों को निर्देश दिए है कि पूरे जिले का सर्वे हो, लखनऊ जनपद से संबंधित इतिहास पर लिखी गई सभी पुस्तकों का संकलन किया जाए एवं प्रमुखता से गड़ व्यवस्था व्यवस्थित की जाए। सह संगठन सचिव ने 5 से 7 दिसंबर को अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के 13वें महाधिवेशन जो कि समालखा, पानीपत में संपन्न हुआ है कि विस्तृत जानकारी बैठक में शामिल लोगों को दी।
बैठक में लखनऊ जनपद के वास्तविक इतिहास से साक्ष्यों के साथ कुछ गूढ़ जानकारी दी एवं इन विषयों पर खोज करके विस्तार से लिखने के निर्देश दिए गए। जानकीपुरम में मड़ियांव गांव में लगभग 150 वर्ष पुराना जानकी मंदिर है जानकी मंदिर के नाम से ही आज जानकीपुरम है l पल्टन मड़ियांव छावनी से ही गदर का प्रारंभ हुआ था।
बैठक में भोजन की चर्चा करते हुए कहा गया कि लखनऊ के भोजन की विशेष शैली यह है कि यहां भोजन बहुत धीमी आंच पर धीरे धीरे पकाया जाता था। इसका उदाहरण है कि लखनऊ में गाजी हैदर के खाने के लिए 8 पराठे बनते थे जिन्हें सुबह से शाम 6 बजे तक पकाया जाता था। इन पराठों को पकाने में 10 किलो घी लगता था। लखनऊ में टिकैतराय जो कि प्रधानमंत्री था, ने पहली आवास विकास योजना प्रारंभ की थी। इस योजना के अंतर्गत 13 विशिष्ट कालोनियां बनवाई गईं, जिसमें बगीचे, तालाब आदि थे। यह सभी स्थान आज भी टिकैतराय के नाम से मौजूद है।
78 ग्राम सभाओं को मिलाकर आसुद्दौला ने लखनऊ की स्थापना की थी। लखनऊ 1851 में विश्व का सबसे बड़ा शहर था।उस समय लखनऊ सुंदरता, तकनीकी, व्यापार, मार्केटिंग के बारे में संपन्न शहर था। वर्तमान परिवर्तन चौक से लेकर हजरतगंज तक एक बाजार लगती थी जिसे खास बाजार कहते थे। खास बाजार में अमीर संपन्न लोग ही जाते थे। दूसरी बाजार नक्खास लगती थी जो आम जनमानस के लिए थी।
1920 में लखनऊ का गवर्नर जनरल लाटूश था। उस समय लखनऊ में हैजा फैला हुआ था। लाटूश ने चारबाग से केसरबाग तक की बस्ती में, नक्शे पर एक रेखा खींची थी। इस रेखा पर जो भी मकान थे, उसने तत्काल उन मकानों को तुड़वा दिया था और एक चौड़े मार्ग का निर्माण करवाया था। जिसे आज लाटूश रोड कहते हैं। इस मार्ग पर जो भी लोग रहते थे उनके लिए लाटूश ने मॉडल घरों को बनवाया था, जिसे आज मॉडल हाउस के नाम से जाना जाता है। इन मकानों की विशेषता यह है कि सभी मकान अलग अलग बने है, पानी निकलने की उचित व्यवस्था है, रोशनी और हवा लोगो को अच्छे से मिलती है l
डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि ऐसी अनेक जानकारियों से लोग आज भी अनभिज्ञ हैं। इस सभी अनछुए पहलुओं पर लिखने का निर्देश राष्ट्रीय सह संगठन सचिव ने बैठक में सम्मिलित सभी सदस्यों को दिया।

