कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी राज्य में पहली बार सरकार बनाने की ओर तेजी से बढ़ती दिख रही है। भारत निर्वाचन आयोग के ताजा रुझानों के अनुसार, भाजपा 294 में से 208 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है या बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के 147 के आंकड़े से काफी ज्यादा है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस इस बार पिछड़ती नजर आ रही है और उसके खाते में करीब 79 सीटें जाती दिख रही हैं। यह परिणाम 2021 के विधानसभा चुनाव से बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रहा है, जब टीएमसी ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी थी।
राज्य की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,114 वोटों के भारी अंतर से हराकर बड़ी जीत दर्ज की है। इस हार को बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव बेहद आक्रामक और हाई-वोल्टेज रहा, जहां भाजपा और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। दोनों पार्टियों ने पूरे दमखम के साथ प्रचार किया और चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया।
राज्य की 293 विधानसभा सीटों (आधिकारिक संख्या) के लिए 23 जिलों में 77 मतगणना केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती हुई। कुल 2,926 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला इस चुनाव में हो रहा है।
अब तक के रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव हो सकता है। अगर ये नतीजे अंतिम परिणाम में भी बरकरार रहते हैं, तो भाजपा पहली बार राज्य में सरकार बनाएगी और बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा।
2021 में जहां ममता बनर्जी ने शानदार जीत दर्ज की थी, वहीं इस बार के रुझान पूरी तरह से अलग कहानी बयां कर रहे हैं। आज का दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है, जहां सत्ता परिवर्तन की पूरी संभावना बनती दिख रही है।

