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फिल्म ‘मुग़ले आज़म’ के निर्देशक के. आसिफ के जन्म शताब्दी वर्ष पर ‘सिनेमा संसार: कला या बाजार’ विषय पर हुआ विमर्श

इटावा। ‘मुग़ले आज़म’ के निर्देशक के. आसिफ के जन्म शताब्दी वर्ष में उनके अपने शहर इटावा में के. आसिफ जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन के.आसिफ़ इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की पांचवी कड़ी के तौर पर आयोजित हुआ। समारोह में अतिथियों ने मांग की कि आसिफ़ के जन्म स्थान इटावा में उनका स्मारक और फ़िल्म संस्थान बनाया जाना चाहिये।

इस्लामिया इंटर कॉलेज सभागार में ‘सिनेमा संसार: कला या बाजार’ विषय पर विमर्श में वक्ताओं ने कहा कि मुग़ले-आज़म सेल्युलाइड पर रची गयी प्रेम कविता है जो मुहब्बत का पैगाम बांटती है।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इटावा में के.आसिफ के नाम पर फिल्म इंस्टीट्यूट बनाये जाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में एक अच्छे फिल्म इंस्टीट्यूट की बेहद जरूरत है तो क्यों ना इसके लिए आवाज उठाई जाए ताकि केंद्र व राज्य की सरकारें इसके लिए काम करें। उन्होंने के. आसिफ से जुड़े एक रोचक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब फिल्म मुगल-ए-आजम बन रही थी तो निर्देशक के. आसिफ ने फिल्म के प्रोड्यूसर शापुर जी पालोन जी से कहा कि उन्हें शूटिंग के लिए असली मोती चाहिए क्योंकि वह उस आवाज को सुनाना चाहते हैं जो सच्चे मोतियों के गिरने से होती है। अधिक खर्च की वजह से उस वक्त शापुर जी इसके लिए तैयार नहीं हुए और दोनों के रिश्ते ऐसे हो गए कि बातचीत भी बंद हो गई। बाद में शापूरजी असली मोती लेकर आये तब शूटिंग शुरू हुई।

सिनेमा संसार: कला या बाजार विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे लिए आत्मा कला है और बाजार शरीर है। आत्मा कभी मरती नहीं है। कला का कोई मोल नहीं होता। उन्होंने कहा कि के. आसिफ में कला थी, वह हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। सिर्फ 3-4 फिल्में बना कर ही वह अमर हो गए।

विश्व सिनेमा के जानकार और प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक अजित राय ने कहा आसिफ़ ने कि एक-एक घटना को पर्दे पर ऐसे उतारा कि उसकी तपिश या शीतलता को लोगों ने सिनेमाहॉल में बैठकर महसूस किया। उन्होंने कहा कि अनारकली की कहानी का जिक्र इतिहास में नहीं मिलता लेकिन के. आसिफ ने काल्पनिक कहानी और किरदार को ऐसे पेश किया जिसे हर कोई सच मान बैठा।

चर्चित फिल्म क्रिटिक मुर्तजा अली खान ने कहा कि के.आसिफ ने असंभव को संभव करके दिखाया। उन्होंने कहा के. आसिफ के 100 वें साल पर भारतीय डाक टिकट जारी होना चाहिये।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राकेश पाठक ने कहा कि के. आसिफ ने अपनी फिल्म के जरिये हिन्दू-मुस्लिम एकता और मुहब्बत का पैग़ाम दुनिया को दिया है। उनकी जिंदगी के तमाम पहलुओं को समेटे एक मुकम्मल किताब और दस्तावेजी फिल्म बनना चाहिए।

इटावा नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन फुरकान अहमद, इस्लामिया इंटर कालेज के मैनेजर मो. अल्ताफ एडवोकेट,डॉ कुश चतुर्वेदी ने भी समारोह को सम्बोधित किया।

इस अवसर पर आयोजन के शिल्पकार शाह आलम का अभिनंदन किया गया। आयोजन में प्रेस क्लब इटावा के अध्यक्ष दिनेश शाक्य, इस्लामिया इंटर कालेज के प्रिंसिपल गुफरान अहमद, दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम, डॉ. रिपुदमन सिंह यादव, डॉ.कमल कुमार कुशवाहा, कुलदीप कुमार बौद्ध, रूद्र प्रताप, मोहित यादव, शीलेन्द्र सिंह, डॉ. हेमंत यादव, वीरेन्द्र सिंह सेंगर, दुर्गेश चौधरी, राम सुंदर यादव, मास्टर विनोद सिंह आदि शामिल रहे।

जन्म शताब्दी समारोह में आए हुए फिल्म अभिनेता अवधेश चौहान, प्रसिद्ध फिल्म सिंगर डॉ. नीता और फिल्म निर्देशक डॉ. अवनीश सिंह को भी सम्मानित किया गया।

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